India News (इंडिया न्यूज), Kumari Selja : अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव, पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं सिरसा की सांसद कुमारी सैलजा ने कहा कि राहुल गांधी नेता प्रतिपक्ष है पर संसद की कार्यवाही में उन्हें बोलने तक नहीं दिया जाता। उन्हें भी बोलने का मौका दिया जाए और उनकी बात को सदन की कार्यवाही में शामिल किया जाना चाहिए।
आपरेशन सिंदूर के साथ साथ देश में बहुत से मुद्दे हैं, जिसपर चर्चा होनी चाहिए, लेकिन भाजपा सरकार किसी विषय पर चर्चा नहीं करना चाहती। यह सरकार हमेशा से मुद्दों पर चर्चा से भागती रही है। अगर सरकार हर चीज के लिए तैयार हैं तो नेता प्रतिपक्ष का मुंह क्यों बंद कर रहे। नेता प्रतिपक्ष की आवाज दबाना लोकतंत्र का अपमान है।
मीडिया को जारी बयान में कुमारी सैलजा ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर और ट्रंप के सीजफायर के किए गए दावे पर विपक्ष ने सरकार से जवाब के लिए संसद के दोनों ही सदनों में मांग उठाई पर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को बोलने ही नहीं दिया जा रहा। सरकार विपक्ष की आवाज को दबाने के प्रयासों करती रही है।
राहुल गांधी चाहते है कि सदन में सच्चाई सामने आनी चाहिए। भाजपा जब से सत्ता में आई हैं वह मीडिया के सामने कुछ कहती है और उसी मुद्दे पर सदन में जवाब देने के पर मौन साध लेती है। यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि संसद में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को लगातार बोलने नहीं दिया जा रहा। यह न केवल एक परंपरा का उल्लंघन है, बल्कि देश की लोकतांत्रिक भावना के खिलाफ भी है। हम हमेशा से सुनते आए हैं कि संसद संवाद का मंच है, लेकिन वर्तमान सरकार संवाद से भाग रही है।
सांसद कुमारी सैलजा ने कहा है कि देश में बेरोजगारी, महंगाई, कृषि संकट, सामाजिक तनाव और महिलाओं की सुरक्षा जैसे कई गंभीर मुद्दे हैं, जिन पर चर्चा आवश्यक है। लेकिन भाजपा सरकार हर बार इन मुद्दों से भागती है और विपक्ष की आवाज को दबाने का प्रयास करती है। हम यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि हम चुप नहीं बैठेंगे। विपक्ष की आवाज को संसद में उठाना हमारा संवैधानिक अधिकार है।
कुमारी सैलजा ने विशेष रूप से किसानों की समस्याओं का उल्लेख करते हुए कहा कि देश का अन्नदाता आज न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी ) की गारंटी, कर्ज माफी, सिंचाई सुविधाओं की कमी और फसल बीमा योजना में धोखाधड़ी जैसी समस्याओं से जूझ रहा है। लेकिन सरकार इन मुद्दों पर संवेदनशील नहीं दिख रही। उन्होंने कहा कि किसानों की उपेक्षा लोकतंत्र की रीढ़ को कमजोर करना है। सांसद ने यह भी कहा कि यदि लोकतंत्र में केवल सत्ता पक्ष बोले और विपक्ष को चुप कराया जाए, तो यह लोकतंत्र नहीं, एकतरफा शासन बन जाता है।
सांसद कुमारी सैलजा ने कहा है कि सिरसा के सिविल अस्पताल में केवल 7,600 प्रसूताओं को कॉपर-टी लगी, पर रिकॉर्ड में 11,996 महिलाओं की एंट्री दिखाकर 8 लाख की प्रोत्साहन राशि निकाल ली गई। मतलब हज़ारों महिलाओं का नाम बिना उनकी जानकारी के इस्तेमाल कर दिया गया, क्या महिलाओं की सहमति, गरिमा और स्वास्थ्य की कोई कीमत नहीं बची? यह केवल वित्तीय घोटाला नहीं, यह महिलाओं के अधिकारों और स्वाभिमान के साथ खुला खिलवाड़ है। जब मातृत्व और प्रसव जैसे पवित्र अनुभवों को भी भ्रष्टाचार की नजर से नहीं बख्शा जा रहा तो फिर किस सुरक्षा और सम्मान की बात कर रही है भाजपा सरकार?
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