Categories: Haryana

जानें कुरुक्षेत्र के ‘बाणगंगा तीर्थ’ के बारे में…जिसका इतिहास महाभारत से जुड़ा, जहां भीष्म पितामह ने अपने प्राण त्यागने से पहले अंतिम बार पिया था पानी

कुरुक्षेत्र-इशिका ठाकुर, India News (इंडिया न्यूज), Kurukshetra Baan Ganga Tirtha : कुरुक्षेत्र को महाभारत पूरे विश्व में जाना जाता है। कुरुक्षेत्र में महाभारत की लड़ाई लड़ी गई थी जो कौरव और पांडवों के बीच में हुई थी। यह लड़ाई कुरुक्षेत्र कैथल करनाल जींद पानीपत पांच जिलों की भूमि पर लड़ी गई थी जिसको अब 48 कोष कहा जाता है। महाभारत की लड़ाई के लिए 48 कोष की भूमि में 350 से ज्यादा तीर्थ स्थल चिन्हित किए गए हैं। जब कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के अंतर्गत आते हैं।  इन्हीं में से एक तीर्थ बाणगंगा तीर्थ है जिसका इतिहास महाभारत से जुड़ा हुआ है।

युद्ध के दौरान भीष्म पितामह कहीं दिन तक बाण की सैया पर लेटे हुए थे

बाणगंगा तीर्थ के मुख्य पुजारी जय नारायण ने बताया कि बाणगंगा तीर्थ कुरुक्षेत्र के दयालपुर गांव में स्थित है यहां पर भीष्म पितामह ने अपनी अंतिम सांस ली थी और इस स्थान पर ही भीष्म पितामह ने अंतिम बार जल ग्रहण किया था। युद्ध के दौरान भीष्म पितामह कहीं दिन तक बाण की सैया पर लेटे हुए थे। क्योंकि उनको इच्छा मृत्यु का वरदान मिला हुआ था और तब उन्होंने अपने प्राण त्यागने से पहले पानी पीने की इच्छा जाहिर की। 

तब सभी योद्धा उनके लिए पानी लेकर आए लेकिन उन्होंने कहा कि जिसने मुझे बानो की सैया पर लेट आया है उसके हाथ से ही मुझे गंगा का जल ग्रहण करना है। तब भगवान श्री कृष्ण के कहने पर अर्जुन ने अपने धनुष से यहां पर बाणगंगा को निकाला था और तब उन्होंने अंतिम बार अपना जल ग्रहण किया और अपने प्राण त्यागे थे। और इसलिए इस तीर्थ का निर्माण हुआ जो आज भारत ही नहीं विदेश में भी जाना जाता है।

इस सरोवर के कई अनसुलझे रहस्य

पंडित पवन कुमार ने कहा कि बाणगंगा तीर्थ का विशेष महत्व है यहां पर बाणगंगा सरोवर है । जो कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के अंतर्गत आता है। इस सरोवर के कई अनसुलझे रहस्य है। उन्होंने बताया कि कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड और ग्राम पंचायत के द्वारा इस सरोवर की कई बार खुदाई की गई है । लेकिन कभी भी खुदाई पूरी नहीं हो पाई। उन्होंने बताया कि इसके अंदर एक छोटा हुआ है और जब इसका पानी निकालते हैं तो इसका पानी कभी भी खत्म नहीं होता नीचे से और पानी आता रहता है इसलिए इसकी पूरी खुदाई नहीं हो पाई है। 

यही नहीं पता चला कि वह किस धातु का बना हुआ

उन्होंने कहा कि जब अर्जुन ने धरती में तीर मार कर बाणगंगा को निकाला था तो उसे  इसी से जोड़कर देखा जाता है। उन्होंने कहा कि इसके अंदर एक लकड़ी नुमा कुछ वस्तु है जो पहले हम अपने घरों के छत के ऊपर सपोर्ट के लिए लगाते थे वह इस प्रकार का प्रतीत होता है। और उसका आकार तीर के जैसा है। उसके ऊपर भी कई बार रिसर्च करने की कोशिश की गई है लेकिन उसका यही नहीं पता चला कि वह किस धातु का बना हुआ है।

जिसका विख्यान वामन पुराण में मिलता

पंडित ने बताया कि बाणगंगा तीर्थ पर पूजा अर्चना करने का विशेष महत्व मिलता है यहां पर स्नान करने से कई प्रकार के पाप और कष्ट दूर होते हैं। पुराणों के अनुसार भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को इस स्थान पर पिंडदान करने से इंसान को मुक्ति प्राप्त होती है। जिसका विख्यान वामन पुराण में मिलता है। इसलिए यहां पर हजारों लाखों की संख्या में हर साल श्रद्धालु आते हैं और पूजा अर्चना करते हैं भारत ही नहीं विदेशों से भी यहां पर तीर्थ स्थल पर लोग भ्रमण करने के लिए आते हैं।

हजारों लाखों पर्यटक भ्रमण करने के लिए आते

उन्होंने बताया कि बाणगंगा तीर्थ महाभारत से जुड़ा हुआ है और यहां पर इस तीर्थ की वजह से हजारों लाखों पर्यटक भ्रमण करने के लिए आते हैं। इसकी वजह से इनका गांव भारत ही नहीं विदेशों में भी जाना जाता है उन्होंने कहा कि यही वह स्थान है जहां पर भीष्म पितामह ने अपने प्राण त्यागे थे और प्राण त्यागने से पहले अंतिम बार जल ग्रहण किया था।

Recent Posts

NMA Hosts 4th J. N. Tata Memorial Lecture in Navsari

Shri T. V. Narendran, President, AIMA and CEO & Managing Director, Tata Steel Limited, addresses…

2 minutes ago

Six Students Script Their Success Story by Becoming Authors

New Delhi [India], June 17: Twin Win, a leading educational institution focused on nurturing communication,…

13 minutes ago

From a Parent’s Frustration to a National Education Platform: The Story Behind Qurocity

From a Parent’s Frustration to a National Education Platform: The Story Behind Qurocity New Delhi…

2 hours ago