India News (इंडिया न्यूज), Selja Attacked The Government : अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव, पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं सिरसा की सांसद कुमारी सैलजा ने सिरसा, हिसार, फतेहाबाद और जींद जिलों के बाढ़ग्रस्त गांवों के दौरे के बाद कहा कि आज पूरा हरियाणा बाढ़ जैसी विकट आपदा से जूझ रहा है। पिछले 11 सालों से सरकार विकास के नाम पर गुमराह कर रही है, जब सरकार को पता है कि हर साल बाढ़ आने का संभावना रहती है तो उससे बचाव को लेकर चंडीगढ़ में बैठकर प्लानिंग क्यों नहीं की जाती? क्यों नहीं तटबंध मजबूत करवाए जाते? क्यों नहीं नदी, नहरों और नालों की सफाई करवाई जाती, कागजों का पेट भरने से न तो बाढ़ रुकेगी और न ही जान माल की हानि को रोका जा सकता है, सरकार को जनहित को ध्यान में रखते हुए कदम उठाना ही होगा, काम के नाम पर सरकार को गुमराह करने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त करवाई करनी होगी।
मीडिया से बातचीत करते हुए सांसद कुमारी सैलजा ने कहा कि कल नरवाना क्षेत्र के गांव फरैन कलां, भिखेवाला, दनौदा, जाजनवाला, टोहाना के गांव लहरियां, चांदपुरा और सिरसा के गांव फरवांई कलां, रंगा, मत्तड, पनिहारी सहित अनेक प्रभावित गांवों का दौरा कर ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं तो पता चला कि सरकारी स्तर पर अभी तक कोई ठोस कार्य नहीं की जा रही है, ग्रामीण स्वयं को बचाने के लिए ही तटबंधों को पक्का करने में लगे हुए है।
सांसद ने कहा कि घग्गर नदी पर सीधे कोई बांध नहीं है, लेकिन इसकी सहायक नदी कौशल्या पर डैम बना है। यह डैम पंचकूला जिले के पिंजौर के पास है। नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट की रिपोर्ट के अनुसार 1852 से लेकर अब तक घग्गर नदी पंजाब व हरियाणा के विभिन्न हिस्सों में 18 बार बाढ़ का कहर बरपा चुकी है। फतेहाबाद जिले में घग्गर नदी 72 किलोमीटर में से गुजरती है। यह 30 गांवों से होते हुए जाती है। घग्गर नदी की वजह से साल 1988 और 1992 में सबसे भयंकर बाढ़ आई थी। सरकार के पास सारे आंकड़े है फिर भी घग्घर नदी से आने वाली बाढ़ को रोकने की दिशा में कोई ठोस कार्य नहीं कर सकी है।
सासंद ने बताया कि लगातार बारिश के कारण जलभराव से खेत डूब चुके हैं, फसलें पूरी तरह नष्ट हो गई हैं, कई घरों में दरारें आ गई हैं और दूषित पानी घरों तक पहुंचने से बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। इसके बाद बाढ़ से हजारों एकड़ फसल बर्बाद हो चुकी है मकान गिर चुके है या दरारें आ चुकी है, जान माल का नुकसान हो रहा है, बेजुबान पशु मर रहे हैं। यदि भाजपा सरकार ने मानसून से पहले नालों की सफाई, निकासी व्यवस्था और बचाव योजनाओं पर काम किया होता तो आज यह भयावह स्थिति पैदा नहीं होती। यह पूरी तरह सरकार की लापरवाही और प्रशासनिक विफलता का नतीजा है।
प्रदेश में बाढ़ से व्यापक नुकसान हुआ है। पिछले 11 सालों में अगर देखा जाए तो सरकार नुकसान होने के बाद ही हवा में हाथ पांव मारती दिखाई देती है] जबकि उसे समस्या के स्थायी निदान पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। सरकार मुआवजे के लिए किसानों से एक ही बात कहती है कि पोर्टल पर जानकारी डालो, पर दूसरी ओर सर्वर डाऊन रहने से पोर्टल ठप पड़ा रहता है और किसान समय पर नुकसान के बारे में सूचना अपलोड नहीं कर पाता, शायद ऐसा जानबूझकर तो नहीं किया जा रहा ताकि सरकार किसानों को मुआवजा देने से बच सके।
कुमारी सैलजा ने जोर देते हुए कहा कि अब सरकार की जिम्मेदारी है कि वह समय पर प्रभावित किसानों को तुरंत उचित मुआवजा दे, सभी बाढग़्रस्त गांवों में तेज़ी से राहत और बचाव कार्य शुरू करे, दूषित पानी की समस्या को दूर करने के लिए स्वच्छ पेयजल और दवाइयों की व्यवस्था करे, जिन परिवारों के घर क्षतिग्रस्त हुए हैं उन्हें पुनर्वास और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराए, भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए स्थायी समाधान और ठोस योजना तैयार करे। कुमारी सैलजा ने कहा कि जनता की पीड़ा को अनदेखा करना भाजपा सरकार की आदत बन चुकी है। पर कांग्रेस किसानों और ग्रामीणों के साथ खड़ी है और जब तक हर प्रभावित व्यक्ति को राहत और मुआवजा नहीं मिल जाता, तब तक आवाज उठाती रहेगी।
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