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पानीपत में 800 वर्ष प्राचीन श्री दिगंबर जैन बड़ा मंदिर, 1500 वर्ष पुरानी भगवान पार्श्वनाथ की प्रतिमाएं भी मंदिर प्रांगण में स्थापित, यमुना से प्रकट हुई थी यह प्रतिमाएं

India News (इंडिया न्यूज), 800 Years Old Shri Digambar Jain Bada Mandir Panipat : पानीपत शहर अतिशयकारी एवं एतिहासिक जैन नगरी रूप में प्रसिद्ध रही है। पानीपत का सबसे महौल्ला जैन महौल्ला ऊन बाजार के रूप में प्रसिद्ध रहा है।जानकारी देते हुए एडवोकेट मेहुल जैन ने बताया कि पानीपत में 800 वर्ष प्राचीन श्री दिगंबर जैन बड़ा मंदिर जैन महोल्ला में स्थित है प्रमाणिक रुप से अति प्राचीन 1500 वर्ष प्राचीन भगवान पार्श्वनाथ की प्रतिमाएं भी मंदिर प्रांगण में स्थापित है। ऐसा बताया जाता है यह प्रतिमाएं यमुना जी से प्रकट हुई थी। 

यहां मूल प्रतिमा भगवान पार्श्वनाथ की 400 वर्ष प्राचीन

एडवोकेट मेहुल जैन ने बताया कि पानीपत सेठ दुंदीमल जैन के द्वारा स्थापित 250 वर्ष से भी अधिक प्राचीन मंदिर कायस्थान महौल्ला पानीपत में विराजमान हैं। यहां मूल प्रतिमा भगवान पार्श्वनाथ की 400 वर्ष प्राचीन है। वहीं जैन महौल्ला स्थित श्री दिगंबर जैन महावीर जिनालय(छोटा मंदिर) हाल में जिसका जीर्णोद्धार का कार्य चल रहा है। 200 वर्ष प्राचीन है इस मंदिर का निर्माण राजा हरसुख राय और उनके पुत्र राजा शुगन चंद के द्वारा किया गया। उन्होंने पूरे भारत में 108 मंदिर का निर्माण किया जिसमें हस्तिनापुर का बड़ा मंदिर के साथ करनाल, हिसार, सोनीपत, पानीपत, सांगानेर में मंदिरों का निर्माण किया।

पूरे देश में एकता की मिसाल

लगभग 100 साल से भी अधिक प्राचीन श्री दिगंबर जैन नेमिनाथ जिनालय पानीपत के सबसे पुराने बाजार गुड मंडी बाजार व मेन बाजार के मध्य में बना है। यह मंदिर का निर्माण लाला बनवारी लाल जैन ने करवाया था। 65 वर्ष प्राचीन श्री दिगंबर जैन महावीर जिनालय अग्रवाल मंडी में बना है। यह मंदिर जाटल गांव के श्री चंदगीराम जैन परिवार के द्वारा करवाया गया‌ था। 27 वर्ष प्राचीन श्री दिगंबर जैन ऋषभदेव मंदिर हुड्डा सेक्टर 11-12 में और 23 वर्ष प्राचीन श्री दिगंबर जैन चन्द्रप्रभ जिनालय माडल में बना है।एडवोकेट मेहुल जैन ने बताया कि इन सभी सातों मंदिरो का संचालन एंव देखभाल एक ही संस्था श्री दिगंबर जैन पंचायत के द्वारा किया जाता है जो पूरे देश में एकता की मिसाल है।

दस दिवसीय उत्सव विशेष रुप से श्री दिगंबर जैन बड़ा मंदिर जैन मोहल्ला में मनाए जाएंगे

आज से पर्यूषण पर्व (दसलक्षण धर्म पर्व) का शुभारंभ हो रहा है। जैन धर्म में इस पर्व की बहुत बड़ी विशेषता है। इन दस दिनो में सभी अनुयायी व्रत, उपवास त्याग, तप एवं दान आदि विशेष रूप से करते हैं। दस दिवसीय उत्सव विशेष रुप से श्री दिगंबर जैन बड़ा मंदिर जैन मोहल्ला में मनाए जाएंगे। इसके अलावा पानीपत में स्थित सभी सातों जैन मंदिर में इस महोत्सव को धूमधाम से मनाया जाएगा। पर्यूषण पर्व के अंतर्गत ही करीबन 250 वर्ष प्राचीन परंपराओं और उत्सवों का आयोजन होगा।  जिसमें विशेष रूप प्रतिदिन प्रातः के समय विशेष पूजा विधान का आयोजन होगा।

पर्वाधिराज दसलक्षण पर्व धूमधाम के साथ मनाए जाएंगे

2 सितंबर धूप दशमी के पावन अवसर पर जोत नगर भ्रमण दर्शन (आरती) का आयोजन किया जाएगा। साथ ही 6 सितंबर को आनंद चौदस के दिवस प्राचीन परंपरा के तहत जल यात्रा का भी आयोजन किया जाएगा। जानकारी देते हुए अधिवक्ता मेहुल जैन ने बताया कि जैन धर्म के दिगंबर अनुयायियों द्वारा आदर्श अवस्था में अपनाए जाने वाले गुणो को दसलक्षण धर्म कहा जाता है।

इसके अनुसार जीवन में सुख शांति के लिए उत्तम क्षमा, मार्दव, आर्जव, सत्य, शौच, संयम, तप, त्याग, अकिंचन और ब्रह्मचर्य आदि दसलक्षण धर्मो का पालन हर मनुष्य को करना चाहिए। दिगंबर जैन समाज के पर्वाधिराज दसलक्षण पर्व धूमधाम के साथ मनाए जाएंगे। पर्यूषण पर्व 28 अगस्त से 6 सितंबर (दसलक्षण धर्म) जैन धर्म के अनुयायी प्रतिदिन व्रत, उपवास एवं विधान आदि का आयोजन किया जाएगा। प्रतिदिन संध्या में आरती और सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन होगा।

धूप दशमी 2 सितंबर (ज्योत नगर भ्रमण)

स्थानीय श्री दिगंबर जैन मंदिर जैन मोहल्ला से श्री दिगंबर जैन पार्श्वनाथ मंदिर दुंदीवालान तक संध्या के समय पवन जोत का नगर भ्रमण कराया जाएगा। यह परंपरा ढाई सौ वर्ष से पानीपत में आयोजित निर्बाध रूप से आयोजित की जा रही है।

अनंत चौदस 6 सितंबर (जल यात्रा)

स्थानीय श्री दिगंबर जैन मंदिर जैन मोहल्ला से दोपहर में जल यात्रा का आयोजन किया जाएगा। तत्पश्चात इंद्रो के द्वारा भगवान श्री पारसनाथ की बड़ी मूर्ति का महा मस्ताकाभिषेक किया जाएगा।

क्षमा वाणी पर्व 8 सितंबर

पर्यूषण पर्व के सम्पूर्ण होने पर सभी एक दूसरे से पूरे वर्ष में हुई या की गई गलती या त्रुटि के लिए क्षमा याचना करेंगे। यह पर्व अपने आप में अनोखा पर्व है जैन धर्म में सभी लोग वर्ष में एक बार एक दूसरे से क्षमा याचना करते हैं कि पूरे वर्ष में जो भी गलती हमसे किसी के प्रति हुई है, उसके लिए क्षमा याचना करते है इसी अवसर पर दसलक्षण धर्म उत्सवों में तप त्याग करने वाले श्रावको का सम्मान भी किया जाएगा। 

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