India News (इंडिया न्यूज), Yamuna River Panipat : यमुना उफान पर होने व जलस्तर कम होने पर भूमि कटाव का कहर जारी है, जिसमें हथवाला घाट से काफी दूरी पर स्थित अंतिम ठोकर के पास भूमि कटाव होने के कारण खेतों की तरफ जाने वाले रास्ते व आसपास में जमीन को अपनी चपेट में ले लिया जिससे गहरा गड्ढा होने के कारण जहां किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
कटाव को रोकने के लिए कर्मचारियों द्वारा करीब आठ के आसपास 8000 मिट्टी से भरे कट्टों की कच्ची ठोकर बनाई गई है। उधर गांव राकसेडा रकबे में पिछले 10 – 12 दिनों के अंदर हरियाणा की तरफ 90 एकड़ व यमुना पार इसी रकबे में 50 एकड़ से अधिक धान व मक्की के अलावा अन्य फसल बर्बाद होने पर आहिस्ता आहिस्ता जमीन कट कर यमुना के पानी में समा गई। फसल बर्बाद होने से जहां किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ दिखाई देने लगी है।
वहीं जलस्तर कम होने पर फिलहाल कटाव का कहर जारी है जिसको लेकर गांव सिभलगढ के सरपंच ने प्रशासनिक अधिकारी को अवगत कराते हुए पांच नई ठोकर व पुरानी ठोकर की रिपेयरिंग करवाने की मांग की है। दूसरी ओर सरपंच ने नहरी विभाग व सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। इसके साथ ही हरियाणा यूपी पुलिस के नीचे भी हालत ठीक नहीं है।
दरअसल यमुना का पानी चारों तरफ फैल जाने से हरियाणा की तरफ भूमि कटाव के चलते रोजाना आहिस्ता आहिस्ता जमीन कट कर यमुना के पानी में समा रही है इसके अलावा यमुना पार खड़े पॉपुलर के पेड़ खतरे के निशान पर है लेकिन यहां पर विभाग की ओर से कोई उचित कदम नहीं उठाया गया। उधर ग्राम पंचायत हथवाला की ओर से ग्रामीणों को यमुना की तरफ न जाने को लेकर मुनादी कराई जा रही हैं।
उल्लेखनीय है कि काफी दिन पहले यह बात सामने आई थी कि इस बार झमाझम बारिश के चलते यमुना उफान पर होने के संकेत मिल रहे हैं जिसका परिणाम यह हुआ कि अगस्त महीने में कुछ दिन पहले हथिनी कुंड बैराज से सभी द्वार खोले गए हैं और यमुना में समय के अनुसार पानी छोड़ा गया जिससे यमुना उफान पर होने के कारण नहरी विभाग की सभी तैयारियां धरी की धरी रह गई जिसमे कटाव को रोकने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए और इसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। इस साल विभाग द्वारा हथवाला घाट पर एक करोड़ 54 लाख की लागत से पांच नई ठोकर व अन्य जगह पर 200 फुट की लंबाई में रिवेटमेंट बनाई गई थी इसके अलावा 8000 से अधिक मिट्टी से भरे कट्टों की व्यवस्था करने के अलावा स्थिति पर नजर रखने के लिए बेलदारों की ड्यूटी लगी गई ।
उधर हरियाणा यूपी के नीचे नजर डाली जाए तो करीब 1 या डेढ़ साल पहले लगभग 40 करोड़ की लागत से बांध बनाने का फैसला लिया गया था, जिसका एस्टीमेट बनाकर हेड ऑफिस भेजा गया। पिछले दिनों इसकी मंजूरी मिलने की बात सामने आई थी लेकिन फिलहाल यहां पर यमुना उफान पर होने व जलस्तर कम होने के चलते भूमि कटाव ने अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया है। उधर गांव हथवाला निवासी किसान निरमेश त्यागी के मुताबिक यमुना उफान के चलते अब तक 40 एकड़ में खड़ी की फसल बर्बाद हो गई और आने वाले समय में भी किसानों के लिए परेशानी खड़ी हो सकती है। उन्होंने बताया कि यमुना क्षेत्र में ज्यादातर गांव के किसान ईख की फसल की पैदावार करते आ रहे हैं। फसल बर्बाद होने से किसान काफी चिंतित है।
उधर गांव राकसेडा से कुछ ही दूरी पर स्थित गांव सिभलगढ के सरपंच सतीश कुमार ने बताया कि करीब 2 साल पहले राकसेडा रकबे में पांच नई ठोकर व एक पुरानी ठोकर की रिपेयरिंग करवाने की मांग की गई थी जिसको लेकर नहरी विभाग के एसडीओ व कार्यकारी अभियंता ने दौरा कर स्थिति का जायजा लेकर आश्वासन दिया गया था लेकिन इसके बाद आज तक यहां पर कुछ नहीं हुआ जिसका परिणाम यह हुआ कि यमुना उफान पर होने व जलस्तर कम होने पर पिछले 10 – 12 दिनों के अंदर हरियाणा की तरफ 90 एकड़ व यमुना पार राकसेडा रकबे में 50 एकड़ से अधिक धान, मक्की व अन्य फसल बर्बाद होने व जमीन कट कर यमुना के पानी में समा गई फिलहाल भी कटाव का कहर जारी है। शनिवार शाम के समय किसानों ने सरपंच सतीश कुमार को इस मामले से अवगत कराया।
सरपंच ने बताया कि फसल बर्बाद होने को लेकर प्रशासनिक अधिकारी को पत्र भेजकर मामले से अवगत कराते हुए पांच नई ठोकर व पुरानी ठोकर की रिपेयरिंग करवाने की मांग की गई। उन्होंने बताया कि यहां पर अभी तक नहरी विभाग की ओर से कटाव को रोकने के लिए कोई उचित कदम नहीं उठाया गया। वही इस संबंध में नहरी विभाग के जेई प्रदीप ने बताया कि यमुना में पानी का जलस्तर कम होने पर हथवाला घाट से कुछ ही दूरी पर स्थित अंतिम ठोकर के पास भूमि कटाव होने के कारण खेतों की तरफ जाने वाले रास्ते को अपनी चपेट में ले लिया।
जिससे मिट्टी के कट्टों से रास्ते को ठीक किया गया जहां पर कटाव की स्थिति बनी हुई है वहां पर करीब 8 मिट्टी से भरे कट्टों से कच्ची ठोकर बनाई गई है जिसमें लगभग 8000 मिट्टी से भरे कट्टे रखे गए हैं। स्थिति पर नजर रखी जा रही है। उन्होंने बताया कि जहां हालात उत्पन्न हुए हैं वहां पर नई ठोकर बनाने के लिए अक्टूबर महीने में एस्टीमेट बनाए जाएंगे। उधर गांव हथवाला सरपंच पिता कृष्ण ने बताया कि गांव में रोजाना मुनादी कराकर ग्रामीणों को यमुना की तरफ न जाने के लिए अवगत कराया जा रहा है इसके साथ ही यहां पर ग्राम पंचायत के चार लोगों की ड्यूटी लगाई गई है।
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