India News (इंडिया न्यूज), Dr MKK Arya Model School : डॉ .एम.के.के. आर्य मॉडल स्कूल के प्रांगण में दिनांक 28अगस्त 2025 को विद्यालय के प्रधानाचार्य मधुप परासर की अध्यक्षता में विद्यालय का स्थापना दिवस बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर विद्यालय के प्रधान संजीव कपूर, उपप्रबंधक रितु कपूर, ज्योति कपूर, प्रबंधक कमेटी के सदस्य प्रणव कपूर, शैक्षिक सलाहकार मंजू सेतिया, विद्यालय की भाषा व गतिविधि प्रभारी मीरा मारवाह, हीपेश शेपर्ड विद्यालय के प्रशासनिक अधिकारी दीपक गिरधर, विद्यालय के वित्तीय नियंत्रक जसबीर कुमार, अध्यापकगण, छात्र-छात्राएँ और अभिभावक उपस्थित रहे। सर्वप्रथम विद्यालय के प्रधान संजीव कपूर, प्रबंधक कमेटी के प्रत्येक सदस्य तथा अन्य गणमान्य जनों का स्वागत किया गया।
कार्यक्रम का आरंभ यज्ञ हवन से हुआ। हवन की प्रज्वलित अग्नि व सामग्री ने वातावरण को पावन बना दिया। ‘ओम’ की ध्वनि से विद्यालय का संपूर्ण प्रांगण गुंजायमान हो गया। हवन यज्ञ के मुख्य यजमान विद्यालय के चेयरमैन संजीव कपूर उपप्रधान रितु कपूर, ज्योति कपूर व प्रणव कपूर थे। इस हवन यज्ञ में यजमान पक्ष ने उपस्थित सर्वजनो के परिवार के सुख, स्वास्थ्य, आयु, ऐश्वर्य की संपन्नता की कामना की गई। विद्यालय की हेड गर्ल ने अपने भाषण द्वारा विद्यालय के संस्थापक डॉ .महाराज कृष्ण कपूर के व्यक्तित्व, शिक्षा और अन्य क्षेत्रों में उनके योगदान की विस्तृत जानकारी दी। उसने बताया कि डॉ. रायबहादुर महाराज कृष्ण कपूर का जन्म पंजाब के हाफिज़ाबाद में एक संपन्न व शिक्षित परिवार में हुआ, जो कि अब पाकिस्तान में हैं।
1901 में लाहौर मेडिकल कॉलेज से उन्होंने शिक्षा प्राप्त की और उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए इंग्लैंड गए। अप्रतिम प्रतिभा के बल पर पंजाब के प्रसिद्ध चिकित्सकों में अपनी जगह बनाई। वह पंजाब के प्रमुख चिकित्सकों में उनकी गणना की जाती है साथ ही भारत के मेडिकल काउंसिल के सदस्य व विभिन्न शिक्षण संस्थाओं के सदस्य रहे। उन्होंने भारतीय संस्कृति को विशेष महत्व दिया। उन्हें अंग्रेजी सरकार द्वारा रायबहादुर की उपाधि से सुशोभित किया गया।
डॉ .एम.के.के आर्य मॉडल स्कूल को विकसित करने में उन्होंने महान भूमिका निभाई है। इस विद्यालय में बच्चों का चौमुखी विकास होता है। विद्यालय के छात्रों ने न केवल अपने देश में बल्कि विदेशों में भी इसका नाम रोशन किया है। सभी ने “महाराज कृष्ण के चरणों में सौ- सौ बार नमन” गीत गाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इसके उपरांत सांस्कृतिक कार्यक्रम का प्रारंभ हुआ कार्यक्रम में मुख्य रूप से “गंगा अवतरण अमृत धारा” पर लघु नाटिका प्रस्तुत की गई।
इसमें राजा भगीरथ की तपस्या और दृढ़ संकल्प को दर्शाया गया, जिससे गंगा नदी का स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरण हुआ। यह नाटिका गंगा नदी के पावन महत्व, इसके पृथ्वी पर आने की पौराणिक कथा को प्रस्तुत करती है, यह संदेश देती है कि दृढ़ निश्चय और तपस्या से कठिन कार्य भी संभव हैं। छात्र कलाकारों द्वारा शिव आराधना के साथ ही हे ब्रह्मा, विष्णु, महेश सुन लो पुकार…ने सभी को भाव विभोर कर दिया।
विद्यालय प्रधान संजीव कपूर ने सभी कार्यक्रमों की प्रशंसा की और सभी को संबोधित करते हुए कहा कि वास्तव में शिक्षा जीवन का आधार है। बच्चे देश का भविष्य होते हैं। उनको शिक्षित कर ही समाज और देश के विकास के बारे में सोचा जा सकता है। यहाँ बच्चों को पठन-पाठन के साथ-साथ अनुशासन का पाठ पढ़ाया जाता है। सभी विद्यार्थी अनुशासन में रहते हुए परिश्रमी बने,वदेश समाज और मानवता के हित के लिए कार्य करें यही उनका सपना है।
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