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करनाल में नशा विरोधी मुहिम सफल, 91% मामलों में सजा, सिर्फ 7 माह में 50 दोषियों को सजा, डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी बोले- नशे का कारोबार मतलब सीधा जेल

प्रवीण वालिया-करनाल, Anti-drug Campaign Successful In Karnal : करनाल के जिला न्यायवादी डॉ. पंकज सैनी ने कहा कि हरियाणा सरकार प्रदेश को नशा मुक्त बनाने एवं समाज को नशे की लत से छुटकारा दिलाने के उद्देश्य से नशा कानूनों को सख्ती से लागू कर रही है। इस दिशा में एनडीपीएस एक्ट के तहत जनवरी से जुलाई 2025 तक करनाल जिले में नशा संबंधी मामलों में 91 प्रतिशत सजा सुनाई गई है।

  • नशा संबंधी मामलों की तेज सुनवाई के लिए बनी स्पेशल कोर्ट
  • स्कूल-कॉलेजों में चलाए जा रहे जागरूकता अभियान

सैशन कोर्ट में 55 केसों का निपटारा – 50 में सजा, 5 में बरी

डॉ. सैनी ने बताया कि जनवरी से जुलाई 2025 तक नशा संबंधी मामलों में सैशन कोर्ट ने कुल 55 मामलों का निपटारा किया, जिनमें से 50 मामलों में आरोपियों को सजा सुनाई गई, जबकि 5 मामलों में आरोपियों को बरी किया गया। इन मामलों में दोषियों से अफीम, गांजा, चरस और स्मैक जैसी नशीली पदार्थों की अधिक मात्रा बरामद की गई थी।

करनाल में बनी नशा संबंधी स्पेशल कोर्ट

नशा संबंधी मामलों की सुनवाई तेजी से करने के लिए चार महीने पहले करनाल में एक स्पेशल कोर्ट की स्थापना की गई है। इस कोर्ट में केवल उन मामलों की सुनवाई की जाती है, जिनमें आरोपियों से नशीले पदार्थों की अधिक मात्रा बरामद होती है। इससे ट्रायल की प्रक्रिया तेज हुई है और दोषियों को शीघ्र सजा मिल रही है।

छात्रों और जनता को किया जा रहा है जागरूक

जिला न्यायवादी ने बताया कि नशा संबंधी मामलों को गंभीरता से लेते हुए प्रत्येक माह उपायुक्त उत्तम सिंह की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की जाती है। इसमें पुलिस विभाग, जिला न्यायवादी, स्वास्थ्य विभाग, कृषि विभाग, ड्रग कंट्रोल अधिकारी, समाज कल्याण अधिकारी, नोडल अधिकारी और एचएसएनसीबी करनाल के अधिकारी शामिल होते हैं।
इन बैठकों में उपायुक्त द्वारा समय-समय पर स्कूलों और कॉलेजों में जागरूकता अभियान चलाने और जनता को नशे की बुराइयों से अवगत कराने के निर्देश दिए जाते हैं।

नशे के कारोबारियों को सख्त संदेश

डॉ. सैनी ने कहा कि सरकार और उच्चाधिकारियों के दिशा-निर्देशों के अनुसार एनडीपीएस एक्ट के तहत जिले को नशा मुक्त बनाने का प्रयास लगातार जारी है। सरकारी वकीलों द्वारा कोर्ट में गवाहों और सबूतों को मजबूती से पेश किया जाता है, ताकि आरोपियों को अधिक से अधिक सजा दिलाई जा सके। उन्होंने कहा कि कड़ी सजा के प्रावधानों से नशे के कारोबार में संलिप्त लोगों को यह स्पष्ट संदेश दिया जा रहा है कि इस धंधे में शामिल होना सीधा सलाखों के पीछे पहुंचना है।

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