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अनिल विज का बड़ा बयान : संत और कथावाचक में बहुत अंतर, चार किताबें पढ़कर कथावाचक बन जाते, लेकिन संत ही सनातन व ज्ञान को युगों-युगों से आगे बढ़ा रहे

India News (इंडिया न्यूज), Minister Anil Vij : हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज ने कहा कि ‘‘संत ही हमारी संस्कृति के सरंक्षक है। संत ही सनातन व ज्ञान को युगों-युगों व सदियों से आगे बढ़ा रहे हैं और लोगों तक पहुंचा रहे हैं। उन्होंने कहा कि धर्म भी आदमी की भूख होती है क्योंकि आदमी को धर्म की आवश्यकता है और धर्म का ज्ञान किसी संत से ही मिल सकता है’’। विज आज यहां चंडीगढ़ में मीडिया कर्मियों के सवालों का जवाब दे रहे थे।

कोई भी चार किताबें पढ़कर कथावाचक बन सकता हैं

उन्होंने कहा कि संत और कथावाचक में बहुत अंतर होता है। कोई भी चार किताबें पढ़कर कथावाचक बन सकता हैं परंतु कथावाचक का पूर्ण ज्ञान नहीं हो सकता है। उन्होंने कहा कि अभी हाल ही में अनिरुद्धाचार्य महाराज ने महिलाओं के बारे में विवादित बयान दिए हैं। इस बयान को हमारा धर्म, संस्कृति और हमारा देश किसी भी हालत में स्वीकार नहीं कर सकता है।

यदि मनोरंजन के लिए जाना है तो कथावाचक ठीक है, लेकिन ज्ञान के लिए संत को ढूंढना होगा

संत के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि ‘‘संत वो होता है जो वैराग्य से मोह, माया के जाल से मुक्त होकर, त्याग व तपस्या करके, शास्त्रों का ज्ञान करके और परमात्मा के साथ अपनी तार जोड लेते है, और उन्हीं का असली ज्ञान है। हालांकि बहुत सी जनता कथावाचकों के पास सुनने के लिए जाती है परंतु जितना मैं जानता हूं कि यदि मनोरंजन के लिए जाना है तो कथावाचक ठीक है, लेकिन अगर ज्ञान के लिए किसी ने जाना है तो किसी न किसी संत को ढूंढना होगा’’। उन्होंने कहा कि ‘‘कथावाचक व संत कौन है, इस पर वे टिप्पणी नहीं करना चाहते हैं, लेकिन हर व्यक्ति को अपने विवेक से यह जानना होगा कि कथावाचक कौन है और संत कौन है’’।

आदमी को धर्म की आवश्यकता है और धर्म का ज्ञान किसी संत से ही मिल सकता

उन्होंने कहा कि ‘‘धर्म भी आदमी की भूख होती है क्योंकि आदमी को धर्म की आवश्यकता है और धर्म का ज्ञान किसी संत से ही मिल सकता है जबकि यह ज्ञान किसी कथावाचक से नहीं मिल सकता है। उन्होंने कहा कि कथा सुनने के लिए वे किसी को मना नहीं कर रहे हैं और न ही रोक लगा रहे हैं लेकिन उनकी समझ के मुताबिक कथावाचक व संत में अंतर होता है परंतु हर आदमी का निर्णय अपना-अपना है’’।

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