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Lakhimpur Kheri News: पांच साल में दूसरी बड़ी त्रासदी, लापरवाही की भेंट चढ़े बाढ़ पीड़ित, लखीमपुर में नाव हादसे से मचा कोहराम

flood victims missing after boat accident: उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के लखीमपुर खीरी (Lakhimpur Kheri) जिले में शनिवार की सुबह एक बड़ा हादसा हो गया। नौव्वापुर (Nawwapur) गांव के पास बाढ़ पीड़ितों (Flood victims) से भरी नाव अधूरे पड़े पुल (incomplete bridge) के खंभे से टकराकर पलट गई। इस नाव में करीब दो दर्जन लोग सवार थे, जिनमें से दो लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। घटना के बाद मौके पर प्रशासन और पुलिस की टीम पहुंच गई है और राहत-बचाव कार्य जारी है।

कैसे हुआ हादसा?

सदर तहसील के नकहा ब्लॉक के नौव्वापुर (Nawwapur) गांव के कई ग्रामीण बाढ़ राहत सामग्री लेने नाव से निकले थे। जैसे ही नाव पुल के अधूरे खंभे के पास पहुंची, वह जोरदार टक्कर से असंतुलित होकर पलट गई। नाव पर सवार ज्यादातर लोग किसी तरह तैरकर सुरक्षित बाहर आ गए, लेकिन दो ग्रामीण अब तक लापता हैं। सूचना मिलते ही SDM सदर अश्वनी कुमार सिंह, भारी पुलिस बल और बचाव दल मौके पर पहुंच गए। वहीं, SP संकल्प शर्मा भी घटनास्थल की ओर रवाना हो चुके हैं।

पांच साल पहले भी हुआ था हादसा

नौव्वापुर (Nawwapur) के इस अधूरे पुल के पास हादसों का इतिहास पुराना है। ग्रामीणों के मुताबिक, करीब पांच साल पहले भी यहां नाव पलट गई थी, जिसमें पांच लोगों की मौत हो गई थी। स्थानीय लोग सरकार और प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहते हैं कि वर्षों से अधूरा पड़ा यह पुल लोगों की जान ले रहा है, लेकिन अब तक इसे पूरा करने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

हर साल बाढ़ की मार झेलता जिला

लखीमपुर खीरी की पांच तहसीलें गोला, पलिया, निघासन, धौरहरा और सदर हर साल बाढ़ से प्रभावित होती हैं। बाढ़ से यहां कई गांव तबाह हो जाते हैं, लोगों के घर-आशियाने उजड़ जाते हैं और खेती-बाड़ी पूरी तरह बर्बाद हो जाती है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद अब तक बाढ़ नियंत्रण और सुरक्षित आवागमन के पुख्ता इंतजाम नहीं हो पाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ और अधूरे पुल की वजह से वे हर साल जोखिम उठाने को मजबूर हैं।

प्रशासन में हड़कंप

नाव हादसे की खबर मिलते ही प्रशासन हरकत में आ गया। बचाव कार्य तेज कर दिया गया है और लापता लोगों की तलाश जारी है। SDM सदर और पुलिस की टीमें मौके पर डेरा डाले हुए हैं। हादसे ने एक बार फिर से जिले में अधूरे पड़े विकास कार्यों और बाढ़ से निपटने की तैयारियों की पोल खोल दी है।
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